समय का अभाव, मानव पर प्रभाव - Spritual Scientist की नजर से
“समय बदल दो दुनिया का उद्धार हो जाएगा, फिर से मानव दुनिया का सरदार हो जाएगा “
एक आम इन्सान की एक आम शिकायत ~
- समय नहीं है !
- काम पूरा कैसे हो ?
- समय पर नहीं पहुंचा, बहुत ट्रैफिक था ।
- समय पर सैलरी नहीं मिली तो EMI कैसे भरूँ ?
- परिवार को समय नहीं दे पाता काम बहुत है !
- आफिस में एक मिनट की भी फुरसत नहीं मिली, तो खाना कैसे खाता ?
उपरोक्त सभी वाक्य आमतौर पर हर जगह सुनने को मिल जायेंगे और एक और जो बहुत ही common है, समय बहुत खराब चल रहा है किसी पर भरोसा ही नहीं किया जा सकता ।
परंतु मुझे कभी ऐसा नहीं प्रतीत हुआ। पता नहीं क्यों, पर हो सकता है मेरी किस्मत ही बहुत अच्छी हो, जो मैं अकेला ऐसा रहा जिसकी किस्मत किसी खास कलम से लिखी गई हो।
बस, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मैने निर्णय लिया कि, मैं ही कोशिश करता हूं, कुछ ऐसा करने की, जिससे समय जो खराब हो गया है उसको ठीक कर दूं । तो बाकि सारी समस्यायें शायद अपने आप ठीक हो जायें। क्योंकि सभी समस्यायें देखने के बाद जो comman शब्द निकल कर आया वो समय ही था। और मैं लग गया इस काम में अकेले ही क्योंकि मुझे लगा मैं बहुत अच्छी किस्मत लिखवा कर लाया है। ये सारी बातें 2003 की है तभी मैंने ये काम शुरु किया था। इस विश्वास, कि मैं यह काम कर पाऊंगा, की जड़ था, मेरा समय पर भरोसा। कि समय कभी खराब नहीं हो सकता । जरूर ही सारे लोग झूठ बोल रहे हैं। और मैंने सोचना समझना शुरू किया उपरोक्त लिखे वाक्यों को और अकेला ही था तो किसी से भी चर्चा करने का कोई कारण था ही नहीं। ना ही किसी को ये समझाने की भी जरूरत थी कि समय कभी खराब नहीं हो सकता!
यानि फालतू के सारे ही वार्तालापों से निजात मिल गयी! और मेरा काम शुरू हो गया।
ये एक श्रृंखला बनेगी तो आपको थोड़ा समय तो निकालना ही पड़ेगा कि आखिर में समय को ठीक कर पाया। यकीन मानिये मुझे Time Scientist जनक नवीन समय चक्र की उपाधि से नवाजा गया। 15 July 2006 को हिसार में जाने माने वैज्ञानिकों वा कई प्रोफेसर के मध्य में एक बहुत ही अच्छे कार्यक्रम में जो किसान धाम में रखा गया था जहाँ किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग भी जाती है।
आपका ही एक साथी हूं मैं भी बस किस्मत शायद अच्छी लिखी गयी। तो अगले अंक में आगे की गाथा के साथ फिर आऊंगा आपके समक्ष ।
Time Scientist Prof. Ashwani Agarwal
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