Monday, 28 October 2024

समय का अभाव मानव पर प्रभाव - भाग 7

 Time Scientist की नजर से


पिछले अंक में हमने 'Art of Leaving" को समझने का प्रयास करने की सोची, और उसको समझने के प्रयास में लग गये। और पहुंच गये कि, बच्चा कभी खाली हाथ आता नहीं, और ना ही कोई खाली हाथ मरता। 


मृत्यु के बाद भी वह खाली हाथ नहीं होता। और ये तुरन्त समझ आ गया कि, "Art of Leaving” इतनी important क्यों हो गयी ?


हर इंसान की एक न्यूनतम इच्छा है कि, वो खाली हाथ ही जाये, इस दुनिया को छोड़ते हुए। क्योंकि ये दुनिया सिर्फ प्रदूषण से भरी है। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ प्रदूषण ही दिखता है, सुनता है, और कुछ भी नहीं।


 तो, मैं ये प्रदूषण लेकर जाऊं - ये नहीं होना चाहिये। पर करे क्या? तो इच्छा भर ही रह जाती है खाली हाथ जाने की। और उसी कष्ट में वो प्राण त्याग देता है। और खुद को खाली करने के चक्कर में, अपना सारा प्रदुषण दूसरों को बांटने में लग जाता है। पर पूरा बाँट नहीं पाता, और शरीर छूट जाता है। 


ये सब मेरे साथ ना हो, मैं खाली हाथ लेकर ही जाऊं, तो मुझे Art of Leaving सीखने व उपयोग करने के अलावा कोई और option बचता ही नहीं।


अब मैं तो पुरुष हुआ हूँ और पैदा मुझे स्त्री करती है। तो मैं करूं क्या ? ये ही मैं नहीं समझ पा रहा कि, क्या Art of Leaving gender आधारित है, या सभी के लिए एक ही system है। और ये विचार ले गया मुझे उस group में!


वहाँ जाकर समझ आया कि, "Art of Leaving" सीखने वा उपयोग करने हेतू  सिर्फ gender ही आधार नहीं हैं, उसमें उम्र का consideration भी करना पड़ता है। तभी समझ आ गया, लोग क्यों जुड़ना चाहते हैं इस system से, और क्यों जुड़ नहीं पाते, गहरी इच्छा होते हुए भी। अब हमारे पास दो ही रास्ते थे, या तो घुसें और करें, या छोड़ें। पर छोड़ने का रास्ता ही तो सीखना है, यानी घुसने के अलावा कोई उपाय बचा ही नहीं हमारे पास तो। हमने दक्षणया दीक्षा ले ली और सीखने हेतु आवेदन जमा करवा दिया। और हमारा तकरीबन 2 लाख रूपये खर्च भी हो गया, इस तक पहुंचने में !


फिर हमें एक शंखमाप की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसने हमारी सीखने की योग्यता बता दी। और क्षमता भी, कि हमें अभी तो सबसे पहले अपनी सीखने की क्षमता को बढ़ाना होगा। अन्यथा कई जन्मों का कार्यक्रम है "Art of Leaving" सीखने का।


योग्यता प्राप्त करेंगें नहीं, तो सीख नहीं पायेंगें। और समझ नहीं प्राप्त करेंगें, तो उपयोग कब करेंगे ? यानि दोनों को एक साथ ही बढ़ाना होगा। 

फिर हमें इन दोनों को बढ़ाने का तरीका सिखाया गया, और हमारा Art of Leaving का सफर शुरू हो गया।


सबसे पहला कदम था, वैचारिक प्रदूषण से मुक्ति प्राप्ति की योग्यता हासिल करना । उस में दो dimensions थीं। एक- अपने विचारों को प्रदूषण मुक्त करना, दूसरी- दूसरों के विचारों के प्रदूषण को अपने अन्दर ना आने देना। 


और शंख के बारे में बताया गया कि, जब तक शंख से नाद निकलेगा, तब तक युद्ध चलता ही रहेगा। और जैसे जैसे वैचारिक प्रदूषण को छोड़ते चले जाओगे, वैसे वैसे ही आपको शंखनाद से मुक्ति व शंख से धुन सुनाई देने लग जायेगी। ये एक automatic system है!


अब समय कह रहा है कि, आगे का अगला अध्याय में लिखना होगा,नहीं तो मुश्किल हो जायगी पढ़ने वालों को।


तो, ये part 7 यहीं पर समाप्त करने को बाध्य हूं। आपके सुझाव या टिप्पणियां आप चाहें तो Editor को भेज सकते हैं।


आपका अपना Time Scientist

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