Saturday, 26 October 2024

समय का अभाव मानव पर प्रभाव - भाग 6

 Spritual Scientist की नजर से 


पिछले Episode में हम "Art of Leaving" के ऊपर चर्चा कर रहे थे। वहां तक पहुंचे हम लोग एक लम्बा साफर तय करते हुए और बहुत सारी प्रचलित प्रक्रियाओं को समझते देखते हुए। हाँ, छोड़ना सीखें का विचार अटक गया दिमाग में, इस को समझना बहुत जरूरी है। क्योंकि जीवन में दूसरे बोझ पर बने बिना अगर जीवन बिताया जा सकता है तो उससे बेहतर इच्छा तो हो ही नहीं सकती किसी की भी। इसलिये यही एक मात्र रास्ते को समझने हेतु निकल पड़े। क्योंकि उद्देश्य साफ था समय की बीमारी को दूर करना।


जब चलने लगे इस रास्ते पर तो सबसे पहले हमसे ये पूछा गया कि आप क्या छोड़ना चाहते हो? अब इस प्रश्न के लिये तो हम तैयार ही नहीं थे। तो कहा गया list बना कर ले आओ, क्या छोड़‌ना चाहते हो फिर उसी हिसाब से आपकी योग्यता test करी जायेगी और फिर admission दे दिया जायेगा उसी class में। अब सबसे पहला विचार ये ही आया कि अरे ये क्या बात हुई हम इस रास्ते को हो छोड़ देते हैं, क्या फायदा time खराब करने का list बनाओ! पर दो दिन बाद समझ आया कि बना ही लो वर्ना कष्ट में मरना पड़ेगा बोझ तले मरना पड़ेगा कोई option है ही नहीं। तो सबसे पहला विचार ये ही आया कि कष्ट छूट जाय तो Best है। और सबसे उपर लिख दिया। लगा कि बस यही एक छूट जाये तो बहुत है। पर मुझे ये समझ आ गया के कष्ट किस से है ये भी बताना पड़े‌गा तो अच्छा रहेगा कि वो list बना ही हूँ। और फिर समझने की कोशिश शुरू हुई तो पता लगा एक शब्द जिसने ह‌मारी सोच ही बदल दी।


पहले सुनते थे "खाली हाथ आता है खाली हाथ जाता है मनुष्य", और दूसरा, जब आता है तो मुट्ठी बन्द होती है। और तीसरी बात ये समझ आयी कि मुट्ठी बन्द तभी होती है जब उसमें कुछ होता है। खाली हाथ मुट्ठी बना ही नहीं सकता अगर बनायेगा तो मुट्ठी नहीं मुक्का कहलायेगा।


मुठ्ठी मतलब संभालना मुक्का मतलब लड़ाई या धमकाना किसी को। मुट्ठी का मतलब एकता और मुक्के का मतलब दुश्मनी ! तो ये बहुत ही interesting वार्तालाप होने लगी list बनाते बनाते । और Art of Leaving में interest आने लगा। और दुनिया में भ्रम फैला हुआ है ये पता तो था पर इस भ्रम की कोई जड़ भी है ये ज्ञान नहीं था। पता ही नहीं था की भ्रम की भी जड़ होती है। परन्तु इस राह पर चलना शुरू ही किया था अभी कि थोड़े से ही समय में पता लग गया भ्रम की जड़ होती है और काफी कुछ जड़ का समझ भी आने लगा। कि बच्चा बन्द मुठ्ठी लेकर आ रहा है, तो उसकी मुठ्ठी में है क्या? अब हमारी खोज का विषय ये हो गया। फिर पता लगा बच्चा अपने अन्दर 208 हड्डियाँ लेकर आया है। फिर पता लगा liver भी है। धीरे-धीरे इतना कुछ लेकर बच्चा आया है और हम सोचते थे कि खाली हाथ आता है। पर आता है कुछ लेकर ये पक्का हो गया। परन्तु क्या कैसे आदि दिशायें दिखने लगी अब 


दिन भर तो था सूरज का डेरा , चांदनी लायेगी अब अंधेरा


ये दो लाइनें दिखने लगी की अब तो कुछ करे बिना गुजारा है ही नहीं।


आज का छठा episode समाप्त करने का समय हो गया। इसलिये इसको यहीं पर बन्द कर रहा हुं आपके सुझाव Comments आदि जो भी आप ठीक समझें इच्छा आपकी 


आपका साथी & well wisher 

Time Scientist Prof. Ashwani Aggarwal

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