समय का अभाव, मानव पर प्रभाव - Spritual Scientist की नजर से
“समय बदल दो दुनिया का उद्धार हो जाएगा, फिर से मानव दुनिया का सरदार हो जाएगा “
- कृष्ण आये तो पहचाना नहीं
- कृष्णांश आये तो माना नहीं
- राम आये थे जाना नहीं
समय की यात्रा में चलते हुए पिछले episode में हमने समझने की कोशिश की थी कि, वर्तमान में रहना है तो भविष्य की चिन्ता करना आवश्यक है ही। और फिर देखा कि, विवाह एक ऐसा काम हम लोग करते ही हैं भविष्य को ध्यान में रख कर। फिर समझ में आया कि, हम लोग अपने बच्चों को पढ़ाई करवाते है ये सोच कर कि, भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा हो सके। तो फिर से भविष्य की चिन्ता करते ही हैं। पर यहाँ अपने भविष्य की चिन्ता कर रहे हैं या दूसरे के भविष्य की, ये समझने वाली बात आ गयी। क्योंकि बच्चे तो हमारे हैं, पर हमारे भविष्य की चिन्ता करना एक अलग ही विषय है और उनके भविष्य की चिन्ता करना यानि दूसरे के भविष्य की चिन्ता करना। जो कि एक बहुत ही complex काम हो गया। क्योंकि, जब आप अपनी चिन्ता भविष्य को लेकर करते हो तो किसी और से कोई मतलब नहीं रहता, तो सोचने समझने की जरूरत ही नहीं सामने वाले के बारे में।
क्योंकि अपने बारे में तो आप जानते ही हो। तो भविष्य में क्या करना चाहते हो, उसी हिसाब से चिन्ता की दिशा निर्धारित कर सकते हो। और उस पर काम करना भी आसान है।
परन्तु जैसे ही दूसरे के भविष्य का सोचने लगते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न gender का आयेगा ही। लड़का है तो सोच अलग होगी, लड़की है तो सोच अलग होगी। दोनों के लिये यदि आप best चाहते हो, तो आपको दिशा र्निधारण gender आधारित करना ही होगा। अन्यथा उनका भविष्य तो हमेशा ही अधर में लटका रहेगा, कोई भी उसको ठीक नहीं करवा पायेगा। अच्छा यहाँ पर और भी जरूरी समझना ये है कि, मेरा gender क्या है और किस बच्चे के भविष्य का निर्णय लेना है, उसका gender क्या है। यानि, यदि मैं महिला हूं और दूसरा पुरुष है तो समस्या बहुत गहन हो गयी। खास तब तो और भी ज्यादा बढ़ जाती है जब अपने बच्चे के भविष्य का समझना होता है।
तो बच्चे का gender लड़का है, और निर्णय माता पिता को लेना है, कौन ले कैसे ले ? तो यहाँ पर दोनों ही बाजार में खोजने चल देते हैं, किस से सलाह लें ! यहाँ फिर से समस्या और ज्यादा बढ़ गयी कि, पुरूष से सलाह लें या महिला Counsellor के पास जायें।
और एक अच्छा खासा काम project बन जाता है। और उधर से बाजार ने ये कहा, भविष्य की मत सोचो, वर्तमान में रहो। नहीं आता तो हमारे पास आ जाओ हम सिखा देंगे। और एक नये तरह के Counsellors आ गये बाजार में, जिन्हें हम preachers कह सकते हैं। Motivational speakers कह सकते हैं, या कोई भी नाम हो सकता है।
बस, अब तो दिशा दिखने सी लगी कि, सारी दुनिया ही बीमार है या सिर्फ समय बीमार है।
तो इस बिन्दू पर आगे के episode में लिखूंगा । तब तक के लिये आप जो कुछ भी समझे हो, उस पर यदि कोई प्रश्न मन में जागृत हो या कोई
सलाह देना चाहे तो निमंत्रण है।
आपका अपना
Time Scientist Prof. Ashwani Agarwal
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