समय का अभाव, मानव पर प्रभाव - Spritual Scientist की नजर से
“समय बदल दो दुनिया का उद्धार हो जाएगा, फिर से मानव दुनिया का सरदार हो जाएगा “
3rd episode में एक बहुत ही उपयोगी ज्ञान या विज्ञान समझ में आया कि, बहुत ही भ्रम की स्थिति में जी रहा है मानव। यानि, काम तो सारे भविष्य को ध्यान में रखते हुए कर रहा है, परन्तु वर्तमान को पकड़ के रखना चाहता है, जो कि संभव नहीं।
लेकिन बाजार कह रहा है, अरे संभव है!! देख, मेरा रास्ता पकड़ ले, तो तू वर्तमान को पकड़ सकता है। और अपना सारा तन मन धन लगा देगा तभी ये सम्भव है, अन्यथा मुश्किल है।
और जब मैंने समझने की कोशिश की, तन मन धन लगा तो दूंगा, पर धन लाने के लिये तो मुझे अपने तन को किसी और के पास ले जाना पड़ेगा।
मन को उस काम में लगाना पड़ेगा जो वो करवाएगा, तो उतने घंटे के लिये तो मेरा तन व मन अपने साथ नहीं होगा। तो मैं क्या करूँ, आप ही बताओ।
अब यहाँ पर Preacher भी निरूतर सा हो जाता है, क्योकि उसी ने कहा था, तन मन धन से समर्पण करो, तभी समझ खुलेगी। और जब समझ threshold को पार कर जायेगी, तो निर्णय हो जायेगा क्या करना करवाना है।
यहाँ Preacher कामयाब होने लग गये, क्योंकि उन्होंने सिर्फ ये guide किया कि समझ खोलो, और खोलने का रास्ता बता दिया। बाकी कह दिया, भगवान पर भरोसा रखो, जो होगा अच्छा ही होगा। बदले में Preacher को तन मन धन की प्राप्ति हो गयी, दोनों पक्ष प्रसन्न रहने लगे।
अब इसका परिणाम क्या हुआ ? कि आपको किसी Motivational speaker की जरूरत लगने लगी, अपना काम यानि तन मन को कैसे divide करूँ, कि preacher वाला काम भी कर पाऊं और धन भी कमा पाऊं। और धीरे धीरे बच्चों को भी साथ ही लगा लिया, कि तेरा भविष्य अपने आप बन जायेगा, बस लगा रह हमारे साथ। जब तक बच्चे थे, तब तक चलता रहा। जैसे ही बड़े होने लगे, तो उन्हें लगने लगा हमें वो भविष्य नहीं चाहिये जो हमारे माता पिता का था, तो उन्होंने सब को छोड़ दिया।
और अपना भविष्य अपने आप बनाने में लग गये। अब यहां माता पिता ने या समाज ने या Preacher के यहाँ के वातावरण ने बच्चे को कहना शुरू किया कि, जिन्होंने तुम्हें जन्म दिया उन्हे तुम कैसे छोड़ सकते हो इस तरह से ?
यानि, बहुत सारी वो बातें जो एक भ्रम पैदा कर रहीं है दोनों तरफ। यानि जिनको कहा जा रहा है और जो कर रहे हैं। क्योंकि, जब कहने वाले अपने भविष्य बनाने में लगे थे तो बच्चों की तरफ ध्यान गया ही नहीं। और अब बच्चे भविष्य बनाने में लगे हैं तो ये, यानि कहने वाले उनको रोक रहे हैं, अपने पास बुला रहे हैं।
और सारी पृथ्वी के मानव इसी उलझन में जीवन बिता रहें हैं तो जीवन व्यर्थ सा होता दिखने लगा है।
इस episode का समय समाप्त हो गया, तो मुझे भी रुकना ही पड़ेगा। और अगले episode की तैयारी करनी होगी। तो मिलते हैं अगले episode में।
आपका अपना
Time Scientist Prof. Ashwani Agarwal
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